सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि से जुड़ा हुआ माना जाता है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए व्रत, पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यह अवसर केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शुद्धि प्राप्त करने का भी विशेष दिन माना जाता है।
भारत के विभिन्न भागों में इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, पीपल वृक्ष की परिक्रमा तथा पितरों के लिए तर्पण करने की परंपरा है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और दांपत्य सुख के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना से पूजा करती हैं।
आइए जानते हैं Somvati Amavasya 2026 का सम्पूर्ण सार — विस्तार से।
सोमवती अमावस्या 15 जून 2026: तिथि और शुभ समय
- तिथि: सोमवार, 15 जून 2026
- अमावस्या प्रारंभ: 14 जून 2026, शाम 6:30 बजे
- अमावस्या समाप्त: 15 जून 2026, शाम 7:30 बजे
धार्मिक दृष्टि से इस दिन सूर्योदय के समय स्नान और पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी पवित्र नदी, सरोवर या पीपल वृक्ष के समीप पूजा की जाए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। हालांकि, घर पर विधिपूर्वक स्नान और पूजा करने से भी पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
सोमवती अमावस्या का धार्मिक और पौराणिक महत्व
सोमवती अमावस्या विशेष रूप से भगवान शिव, माता पार्वती और पितृ देवताओं को समर्पित मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए व्रत और उपासना से पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा
एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की कन्या के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही थीं। एक संत ने सलाह दी कि यदि वह श्रद्धा से सोमवती अमावस्या का व्रत करे और भगवान शिव की आराधना करे, तो उसकी समस्या दूर हो सकती है। कन्या ने पूरी निष्ठा से व्रत रखा और पूजा की। कुछ समय बाद उसका विवाह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तभी से इस व्रत को वैवाहिक सुख और पारिवारिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाने लगा।
सोमवती अमावस्या व्रत और पूजा विधि
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स्नान और शुद्धिकरण
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या जल स्रोत में स्नान करें, अन्यथा घर पर स्नान करके भी पूजा की जा सकती है।
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व्रत का संकल्प
स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। श्रद्धा अनुसार फलाहार, सात्विक भोजन या निर्जल व्रत रखा जा सकता है।
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आवश्यक पूजा सामग्री
पूजा के लिए शिवलिंग या शिव-पार्वती की प्रतिमा, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, जल, दूध, चंदन, तिल और घी का दीपक रखें।
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पूजा विधि
भगवान शिव का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, पुष्प और धूप-दीप अर्पित करें। शिव मंत्रों का जाप करें तथा पीपल वृक्ष की पूजा कर उसकी परिक्रमा करें।
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पितृ तर्पण
इस दिन तिल और जल अर्पित कर पितरों का तर्पण करना शुभ माना जाता है। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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दान-पुण्य
जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, अन्न या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान विशेष फलदायी होता है।
सोमवती अमावस्या के लाभ
- वैवाहिक सुख: दांपत्य जीवन में प्रेम और स्थिरता बढ़ती है तथा पति की आयु लंबी होने की मान्यता है।
- धन और समृद्धि: पूजा और दान-पुण्य से आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।
- मानसिक और आध्यात्मिक शांति: व्रत और ध्यान मन को शांत करने में सहायक माने जाते हैं।
- पितृ कृपा: तर्पण करने से पितरों की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और घर में शुभता बनी रहती है।
सोमवती अमावस्या मनाने के प्रमुख स्थान
- Varanasi – घाटों और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है।
- Haridwar – गंगा तट और शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
- Rishikesh – शांत वातावरण में शिव उपासना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
- Ujjain – शिव मंदिरों में विशेष पूजन और आयोजन होते हैं।
अन्य अमावस्याओं से सोमवती अमावस्या क्यों अलग है?
हालांकि अमावस्या प्रत्येक माह आती है, लेकिन सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को विशेष शुभ माना गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन की पूजा और व्रत का महत्व कई गुना अधिक माना जाता है।
इस Somvati Amavasya 2026 की सम्पूर्ण जानकारी पाने के लिए पूरा वीडियो हिंदी में देखें।
निष्कर्ष
सोमवती अमावस्या 15 जून 2026 धार्मिक आस्था, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख-समृद्धि से जुड़ा एक विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा भाव से व्रत, पूजा, तर्पण और दान करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है। यदि आप जीवन में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल की कामना करते हैं, तो इस पावन अवसर पर पूरे श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना अवश्य करें।
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