गंगा दशहरा हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और श्रद्धापूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है। यह दिन माँ गंगा के स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि मोक्ष प्रदान करने वाली दिव्य शक्ति हैं। इसलिए उन्हें “मोक्षदायिनी गंगा” कहा जाता है।
गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करके अपने पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व आस्था, आध्यात्मिक शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह पावन पर्व बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं।
आइए जानते हैं Ganga Dussehra 2026 का सम्पूर्ण सार — विस्तार से।
गंगा दशहरा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में गंगा दशहरा 25 जून, गुरुवार को मनाया जाएगा।
- दशमी तिथि प्रारंभ: 24 जून 2026, रात लगभग 9:30 बजे
- दशमी तिथि समाप्त: 25 जून 2026, रात लगभग 11:00 बजे
इस दिन सूर्योदय के समय गंगा स्नान और पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से गंगा नदी में स्नान करने का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
गंगा दशहरा का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी कठिन साधना से प्रसन्न होकर माँ गंगा पृथ्वी पर आने के लिए तैयार हुईं।
लेकिन गंगा के तीव्र वेग को पृथ्वी सहन नहीं कर सकती थी। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया और धीरे-धीरे उन्हें पृथ्वी पर प्रवाहित किया। इसी दिव्य घटना की स्मृति में गंगा दशहरा मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसलिए इसे “दशहरा” कहा गया है।
गंगा दशहरा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
गंगा दशहरा केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्मा की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन किए गए स्नान, जप और दान का विशेष फल प्राप्त होता है।
- गंगा स्नान से मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है
- दस प्रकार के पापों का नाश होता है
- पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है
- दान-पुण्य करने से सुख और समृद्धि प्राप्त होती है
- घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है
इस दिन तर्पण और पिंडदान करना भी अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
गंगा दशहरा 2026 पूजा विधि
गंगा दशहरा के दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि गंगा नदी तक जाना संभव न हो, तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
माँ गंगा, भगवान शिव और राजा भगीरथ का ध्यान करें। पूजा में फूल, धूप, दीपक, चंदन, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र और गंगा मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
गंगा स्तोत्र का पाठ करें और शाम के समय दीपदान अवश्य करें। यदि संभव हो तो किसी नदी या जल स्रोत के किनारे घी का दीपक जलाएं। इस दिन दस वस्तुओं का दान करना भी विशेष फलदायी माना गया है, जैसे—अनाज, फल, वस्त्र, जल, छाता आदि।
गंगा दशहरा मनाने के प्रमुख स्थान
भारत में कई पवित्र स्थानों पर गंगा दशहरा अत्यंत भव्य तरीके से मनाया जाता है। इन स्थानों पर लाखों श्रद्धालु स्नान, पूजा और आरती में भाग लेते हैं।
- Haridwar – हर की पौड़ी की प्रसिद्ध गंगा आरती इस दिन बेहद दिव्य दिखाई देती है।
- Varanasi – काशी के घाटों पर स्नान और शाम की आरती का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है।
- Rishikesh – आध्यात्मिक वातावरण और शांत घाट श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव प्रदान करते हैं।
- Prayagraj – संगम तट पर स्नान और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
- Garhmukteshwar – यह स्थान गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है।
- Patna – गंगा तट पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ पूजा-अर्चना के लिए एकत्र होती है।
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में अंतर
अक्सर लोग गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा को एक ही पर्व समझ लेते हैं, जबकि दोनों का महत्व अलग-अलग है। गंगा सप्तमी वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इसे माँ गंगा के जन्म दिवस के रूप में माना जाता है।
वहीं गंगा दशहरा ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। सरल शब्दों में कहें तो गंगा सप्तमी माँ गंगा के “प्रकट होने” से जुड़ी है, जबकि गंगा दशहरा उनके “धरती पर आने” से संबंधित है।
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निष्कर्ष
गंगा दशहरा 2026 श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर एक अत्यंत पावन पर्व है। यह दिन हमें धर्म, प्रकृति और आध्यात्मिकता के महत्व को समझने की प्रेरणा देता है।
इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही यह पर्व हमें नदियों और प्रकृति के संरक्षण का संदेश भी देता है।
इस गंगा दशहरा श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ गंगा की आराधना करें और अपने जीवन में सकारात्मकता, शांति और खुशहाली का स्वागत करें।
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